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हनुमान जी का विवाह

नमस्कार दोस्तों जैसा कि हम सब जानते हैं कि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे और उन्होंने कभी किसी स्त्री को हाथ नहीं लगाया था। परंतु बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो यह मानते हैं कि उनका विवाह हुआ था। उनका विवाह किससे हुआ था? किन परिस्थितियों में हुआ था और क्यों हुआ था? यह जानने के लिए लेख पढ़े.

हनुमान जी के पुत्र के बारे में ज्यादातर लोग जानते हैं क्योंकि बाल्मीकि रामायण में इसका वर्णन किया गया है जब हनुमान जी सीता जी को खोजने निकले व लंका पहुंचे। उन्होंने सीता माता को श्री राम का सन्देश दिया। भूख लगने पर वह अशोक वाटिका के फल खाने लगे जिन्हें खाने के लिए रख वालों ने उन्हें रोका और हनुमान जी ने उनको मार दिया। उन्होंने रावण के छोटे बेटे अक्षय कुमार को मार दिया। तब मेघनाथ ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर उन्हें बंदी बना लिया और रावण के सामने प्रस्तुत किया। रावण ने उनकी पूंछ में आग लगवा दी। जिस आग से उन्होंने पूरी लंका जला दी। लंका जलाने के बाद पूछ बुझाने के लिए वह समुद्र में पहुंचे जहां उनके पसीने की बूंद गिरी जिसे एक मछली द्वारा पी लिया गया। उस मछली के पेट से मकरध्वज उत्पन्न हुए। जिन्हें अहिरावण ने पाताल लोक का द्वार पर नियुक्त कर दिया। जब राम रावण युद्ध चल रहा था तब रावण ने अहिरावण को जो कि उनका भाई था से भगवान श्रीराम व लक्मण जी का सोते समय अपहरण करा लिया। वह उन्हें पाताल लोक ले गया। हनुमान जी उनके पीछे पाताल लोक पहुंचे और तब उनकी मुलाकात मकरध्वज से हुई और उन्हें पता चला कि उनका कोई पुत्र है। उसके बाद उन्होंने अहिरावण को मारकर भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी को छुड़ाया। भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी को सकुशल लंका लेकर आए। यह कहानी हम सब ने सुनी होगी परंतु क्या आप जानते हैं की हनुमान जी ने सचमुच एक विवाह किया था?
जी हाँ
पाराशर ऋषि जो ज्योतिष के पितामह कहे जाते उनके द्वारा लिखित पुस्तक पाराशर संहिता में हनुमान जी के विवाह का वर्णन है यह घटना इस प्रकार है हनुमान जी भगवान सूर्य से दीक्षा प्राप्त कर रहे थे। उन्होंने सभी तरह की विद्या सीख ली थी परंतु कुछ ऐसी विद्याएं, कुछ ऐसी सिद्धियां थी जिन्हें प्राप्त करने के लिए विवाहित होना आवश्यक था। ऐसी स्थिति में भगवान सूर्य ने एक मार्ग सुझाया क्योंकि हनुमान जी ब्रह्मचारी थे और सूर्य देव की एक पुत्री जिसका नाम सुवर्चला था। वह भी तपस्विनी और ब्रह्मचारिणी थी भगवान सूर्य की आज्ञा पर दोनों ने विवाह किया और अपने तप मार्ग को जारी रखा। दरअसल हनुमान जी को नौ विद्या सीखनी थी जिसमें से 5 व सीख चुके थे और 4 विद्याओं के लिए उन्हें विवाह करना अत्यंत आवश्यक था। इस विवाह के बाद सुवर्चला अपनी तपस्या में लीन हो गई और हनुमान जी ने वह चार विद्या सीख ली। तेलंगना के खम्मन जिले में हनुमान जी का यह एक अकेला ऐसा मंदिर है जो इस बात का प्रमाण है कि हनुमान जी विवाहित थे। इस मंदिर के प्रति तेलंगना के लोगों में विशेष आस्था है और हनुमान जी व उनकी पत्नी के दर्शन करने के लिए लाखों लोग इस मंदिर में पहुंचते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यदि पति-पत्नी के विवाहित जीवन में कोई परेशानी चल रही हो तो इस मंदिर के दर्शन करने मात्र से ही समस्याओं का समाधान हो जाता है।

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