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आईना

ज्यादातर आपने देखा होगा की बड़ी-बड़ी इमारतों में चारों तरफ शीशे लगे होते हैं लिफ्ट में हर जगह शीशे लगे होते हैं घर में बड़े बुजुर्ग हमेशा यह कहते हुए पाए गए हैं कि घर में कांच का टूटना शुभ नहीं होता हमें घर में शीशा किस डायरेक्शन में रखना चाहिए यह वास्तु इस विषय पर क्या कहता है
कई बार ऐसा भी देखा गया है कि आईना लगाने पर घर में परेशानियां बढ़ जाती हैं तो कई बार इसके हमें कई फायदे भी मिलते हैं।
हमें यह जानना चाहिए कि किस दिशा में शीशा लगाना चाहिए वास्तु शास्त्र में दर्पण यानी आईना एक उत्प्रेरक की तरह बताया गया कि किसी भी चीज को बड़ा करने वाला इसके कारण घर में पॉजिटिव एनर्जी मिलती है
वस्तु पर चलने से पहले कुछ सामान्य बात जैसा कि हमने प्रश्न किया था कि लिफ्ट में शीशे क्यों लगाए जाते हैं तो इसका बहुत ही सरल सा जवाब है कि व्यक्ति लिफ्ट के अंदर घुटन महसूस करता था। जिस लिफ्ट में शीशे होते हैं उस लिफ्ट में व्यक्ति का प्रतिबिंब चारों तरफ दिखाई देता है जिससे उसका दिमाग क्या उसका माइंड डिस्ट्रिक्ट हो जाता है वह फालतू की बाते न सोच कर अपने आप को देखने लगता है। self-attention के कारण व्यक्ति का दिमाग डाइवर्ट हो जाता है जिससे उसको डर लगना बंद हो जाता है। या घुटन जैसा महसूस नहीं होता है।

दूसरा प्रश्न यह था विदेशों में गगनचुंबी ईमारते शीशे की क्यों बनाई जाती हैं?

ज्यादातर ठंडे देशों में गगनचुंबी इमारतें जिन्हे हम स्काईस्क्रैपर कहते हैं वह शीशे की बनाई जाती हैं क्योंकि सबसे पहला उसमें पर्याप्त सूरज की रोशनी आती है जिससे ऊर्जा बचती है। दूसरा जब रोशनी अंदर आती है तो वह अंदर के हिस्से को गर्म कर देती हो शीशा लगा होने के कारण अंदर से गर्मी बाहर नहीं जा पाती इसलिए ज्यादातर समय बिल्डिंग गर्म रहती है। भारत जैसे गर्म देश में शीशे की ईमारते इसलिए बनाई जाती हैं क्योंकि इनको बनाने की कीमत सस्ती होती है साथ ही देखने में ईमारते खूबसूरत लगती हैं।
ज्योतिष के अनुसार कांच को शुक्र का प्रतिनिधि माना जाता है इसलिए कांच को शुभता या अमीरी का भी प्रतीक माना गया है। शुक्र यदि अशुभ गृह प्लैनेट के साथ हो जाए तो यह नुकसान भी देता है और यदि है शुभ के साथ हो तो लाभ करता है। वास्तु के अनुसार कांच जल तत्व का प्रतीक माना गया है जिसकी दिशा उत्तर या उत्तर पूर्व होती है इसीलिए घर में उत्तर , उत्तर पूर्व अथवा पूर्व में शीशा लगाना शुभ माना जाता है

बैडरूम
कुछ वास्तु शास्त्रियों का मानना है कि बेडरूम में हमें शीशा नहीं लगाना चाहिए लेकिन ड्रेसिंग टेबल बैडरूम नहीं होता है जिसके अंदर शीशा लगा होना अनिवार्य है क्योंकि महिलाओं को सजने सवरने का शौक होता है। इसलिए हम चाह कर भी बेडरूम से शीशा नहीं निकाल सकते परंतु कुछ वास्तु शास्त्रियों का कहना है कि यदि आप बेडरूम के अंदर शीशा रखना चाहते हैं तो इसे उत्तर, उत्तर पूर्व या पूर्व दिशा में ही रखें दूसरी सबसे बड़ी बात कि जब आप सो रहे हो तो आप का प्रतिबिम्ब शीशे में नहीं दिखना चाहिए, यह पारिवारिक जीवन के लिए उत्तम नहीं होता। यह शीशा पति पत्नी में मन मुटाव पैदा करता है।
यदि आपके पास कोई विकल्प नहीं है कोई ऑप्शन नहीं है तो आप वह शीशा जिसमें सोते समय आपका बेड दिखता है उसे किसी कपड़े से या किसी पर्दे से ढक दें और जिस समय आप को शीशे की आवश्यकता हो आप वह पर्दा हटा कर शीशे का उपयोग कर सकते हैं

रसोईघर
रसोई घर में कभी शीशा नहीं होना चाहिए कांच की खिड़कियां है तो यह अलग बात है लेकिन रसोई में कभी भी शीशा नहीं होना चाहिए, क्योंकि रसोई पर मंगल का प्रतिनिधित्व होता है जिसके कारण कहीं भी शीशा होना सही नहीं माना जाता है।

ड्राइंग रूम
ड्राइंग रूम में शीशा पूर्व अथवा उत्तर दिशा में शुभ माना जाता है यदि आपका ड्राइंग रूम छोटा है तो आप उत्तर पूर्व व पश्चिम में भी शीशा लगवा सकते हैं जिससे ड्राइंग रूम आपको बड़ा लगने लगेगा

मुख्य द्वार
यदि आपके घर के दरवाजे तक सीधी सड़क आने के कारण द्वार वेध हो रहा है और दरवाजा हटाना संभव नहीं है तो दरवाजे पर पाखुंआ दर्पण लगा दें। यह बेहद शक्तिशाली वास्तु प्रतीक है। अत: इसे लगाने में सावधानी रखना चाहिए। इसे किसी पड़ोसी के घर की ओर केंद्रित करके न लगाएं।

बाथरूम
बाथरूम में शीशा अक्सर होता है आपको सबसे पहले इस बात का ध्यान रखना है कि यदि आपका कंबाइंड लैट्रिंग बाथरुम है तो उसके अंदर आपको कमोड नहीं दिखना चाहिए यह अच्छा नहीं माना जाता है साथ ही बाथरूम के शीशे को कभी भी अंधेरे की तरफ ना लगाएं अर्थात शीशे पर हमेशा रोशनी पड़ती रहे यह उत्तम माना जाता है साथ ही प्रयास करना चाहिए कि यह दक्षिण की दीवार पर ना हो तो ज्यादा उत्तम तथा इसे दरवाजे पर भी नहीं लगाना चाहिए
बाथरूम में दर्पण लगाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि दर्पण दरवाजे के ठीक सामने नहीं हो। दर्पण का काम होता है प्रवर्तन यानि रिफ्लेक्ट करना,जब हम बाथरूम में प्रवेश करते हैं तो हमारे साथ सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा दोनों ही बाथरूम में प्रवेश करती है। और जब हम सोकर उठते है तब नकारात्मक ऊर्जा की मात्रा अधिक होती है,दरवाजे के सामने दर्पण होने से हमारे साथ जो भी ऊर्जा बाथरूम में प्रवेश करती है वह वापस घर में लौट आती है। नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए बाथरूम में दर्पण इस प्रकार से लगाना चाहिए ताकि इसका रिफ्लेक्शन बाथरूम से बाहर की ओर न हो।  

घर की तिजोरी या अलमारी के सामने रखा हुआ दर्पण घर में धन की वृद्धि करता है.
आईना कहीं से भी टूटा हुआ नहीं होना चाहिए. साथ ही उसका साफ-सुथरा होना
दर्पण को मनमाने आकार में कटवा कर उपयोग में न लाएं।
मकान का कोई हिस्सा असामान्य शेप का या अंधकारयुक्त हो तो वहां गोल दर्पण रखें।

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