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Ashadha Gupt Navratri, Gupt navratri kyu mante hain, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि

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हिंदू धर्म के अनुसार, एक साल में चार नवरात्रि होती है, लेकिन आम लोग केवल दो नवरात्रि (चैत्र व शारदीय नवरात्रि) के बारे में ही जानते हैं। अश्विन यानि सितम्बर ओक्टुबर और चैत्र यानि मार्च अप्रैल महीने में प्रमुख नवरात्रि आते हैं। माघ यानि दिसंबर जनवरी और आषाढ़ यानि जून जुलाई मास में मनाई जाने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि बोलते हैं।
जैसे सामान्य नवरात्रि मनाई जाती है ठीक उसी प्रकार से गुप्त नवरात्रि में मनाई जाती है। जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है कुछ लोगों का मानना है कि यह खासतौर पर अघोरी पूजा तांत्रिकों के लिए होती है। परंतु जप तप करने वालों के लिए भी यह बहुत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसमें 9 दिनों में हम 10 महाविद्या की दुर्लभ साधनाएं करते हैं। इन 9 दिनों में किए जाने वाले मंत्रों के जप का परिणाम कई गुना अधिक मिलता है।
इस साल आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि कब से शुरू होगी, जानें घटस्थापना मुहूर्त, क्या है इसका महत्व।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2023 डेट (Ashadha Gupt Navratri 2023 Date)

इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा (19 जून, सोमवार) से होगा, जो आषाढ़ शुक्ल नवमी (27 जून, मंगलवार) को समाप्त होगी।
नौ दिन तक 10 महाविद्याओं मां काली, तारा देवी, षोडषी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, और कमला देवी की पूजा की जाती है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि महत्व (Ashadha Gupt Navratri Significance)

गुप्त सिद्धियों को पाने के लिए इस नवरात्रि को सबसे ज्यादा शुभ माना गया है। मान्यता है कि इसी गुप्त नवरात्रि की पूजा के बल पर विश्वामित्र को असीम शक्ति प्राप्त हुईं थी और इसी महापर्व पर साधना करके रावण का पुत्र मेघनाथ ने इंद्र को हराया था। हिंदू मान्यता के अनुसार यदि कोई साधक गुप्त नवरात्रि में एक निश्चित समय पर गुप्त रूप से देवी दुर्गा के पावन स्वरूप की साधना करता है तो उसे उनसे सुख-सौभाग्य और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। शत्रु, ग्रह बाधा और तमाम दुख उससे दूर रहते हैं।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2023 मुहूर्त (Ashadha Gupt Navratri 2023 Ghatsthapana Muhurat)

प्रतिपदा तिथि 18 जून 2023 को सुब 10 बजकर 06 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 19 जून 2023 को सुबह 11 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए हम पहला दिन 19 जून को मानते है।

घटस्थापना मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 23 – सुबह 07 बजकर 27 (19 जून 2023, अवधि 02 घंटे 04 मिनट)

नवरात्रि में शुभ संकल्पों को पोषित करने, रक्षित करने, मनोवांछित सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए और शत्रुओं को मित्र बनाने वाले मंत्र की सिद्धि का योग होता है।
नवरात्रि में स्नानादि से निवृत हो तिलक लगाके एवं दीपक जलाकर यदि कोई बीज मंत्र ‘हूं’ (Hum) अथवा ‘अं रां अं’ (Am Raam Am) मंत्र की इक्कीस माला जप करे एवं ‘श्री गुरुगीता’ का पाठ करें तो शत्रु भी उसके मित्र बन जायेंगे l
माताओं बहनों के लिए विशेष कष्ट निवारण हेतु प्रयोग 1

जिन माताओं बहनों को दुःख और कष्ट ज्यादा सताते हैं, वे नवरात्रि के प्रथम दिन (देवी-स्थापना के दिन) दिया जलायें और कुम-कुम से अशोक वृक्ष की पूजा करें ,पूजा करते समय निम्न मंत्र बोलें :
“ अशोक शोक शमनो भव सर्वत्र नः कुले “

भविष्य पुराण के अनुसार नवरात्रि के प्रथम दिन इस तरह पूजा करने से माताओ बहनों के कष्टों का जल्दी निवारण होता है l
माताओं बहनों के लिए विशेष कष्ट निवारण हेतु प्रयोग 2
शुक्ल पक्ष तृतीया के दिन में सिर्फ बिना नमक मिर्च का भोजन करें l (जैसे दूध, रोटी या खीर खा सकते हैं, नमक मिर्च का भोजन अगले दिन ही करें l)
• ” ॐ ह्रीं गौरये नमः “
मंत्र का जप करते हुए उत्तर दिशा की ओर मुख करके स्वयं को कुम -कुम का तिलक करें l
गाय को चन्दन का तिलक करके गुड़ और रोटी खिलाएं l

श्रेष्ठ अर्थ (धन) की प्राप्ति हेतु (To get the wealth) ‘

➡ प्रयोग : नवरात्रि में देवी के एक विशेष मंत्र का जप करने से श्रेष्ठ अर्थ कि प्राप्ति होती है मंत्र ध्यान से पढ़ें :
” ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमल-वासिन्ये स्वाह् “

विद्यार्थियों के लिए

प्रथम नवरात्रि के दिन विद्यार्थी अपनी पुस्तकों को ईशान कोण में रख कर पूजन करें और नवरात्रि के तीसरे तीन दिन विद्यार्थी सारस्वत्य मंत्र का जप करें।
इससे उन्हें विद्या प्राप्ति में अपार सफलता मिलती है l
बुद्धि व ज्ञान का विकास करना हो तो सूर्यदेवता का भ्रूमध्य में ध्यान करें ।
जिनको गुरुमंत्र मिला है वे गुरुमंत्र का, गुरुदेव का, सूर्यनारायण का ध्यान करें। अतः इस सरल मंत्र की एक-दो माला नवरात्रि में अवश्य करें और लाभ लें l

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