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Kaun si mala se kis devta ka jap karen.

प्राचीन काल से ही जप करना भारतीय पूजा पद्धति का एक अभिन्न अंग रहा है। दोस्तों जप क्यों करते हैं? हम रोज जप करने के लिए कौन सी माला श्रेष्ठ है? हम जप 108 मनको वाली माला से ही हम क्यों करते हैं? यह सब जानने के लिए लेख पूरा पढ़े। Kaun si mala se kis devta ka jap karen.

माला में 108 दाने ही क्यों होते हैं Mala me 108 dane kyu hote hain.

सवाल यह आता है कि माला में 108 दाने ही क्यों होते हैं इस विषय पर योग चूड़ामणि उपनिषद में कहा गया है कि मनुष्य 24 घंटे में 21600 बार सांस लेता है। उसकी दिनचर्या 12 घंटे की होती है। वह 12 घंटों में 10800 बार सांस लेता है। 10800 बार में वह अपने इष्ट की आराधना कर सकता है। एक दूसरी मान्यता है जो ज्यादा प्रमाणिक लगती है। ऋषियों ने कुल 27 नक्षत्रों की खोज की। क्योंकि हर एक नक्षत्र के चार चरण होते हैं अतः इसका गुणनफल 108 आता है इसलिए इस 108 संख्या को परम पवित्र संख्या माना जाता है। एक और मान्यता है कि कुल 12 राशियां होती है और नौ ग्रह होते हैं। जब 9 को 12 से गुणा करेंगे तो भी 108 ही आएगा। इस तरह से यह मान लिया गया या कि हम अपने देवता के मंत्र को 108 बार जपते हैं। तो उसका पूरा फल मिलता है क्योंकि वह ब्रह्मांड का एक चक्कर लगा कर आता है इससे ब्रह्मांड के एक-एक नक्षत्र से हम अपने आराध्य की पूजा करते हैं।

माला में सुमेरु किसे कहते हैं। mala me sumeru kise khate hain.

माला के 108 दानों से यह पता चल जाता है कि जप कितनी संख्या में हुआ। दूसरे माला के ऊपरी भाग में एक बड़ा दाना होता है जिसे सुमेरु कहते हैं। इसका विशेष महत्व माना जाता है। चूंकि माला की गिनती सुमेरु से शुरू कर माला समाप्ति पर इसे उलटकर फिर शुरू से 108 का चक्र प्रारंभ किया जाने का विधान बनाया गया है इसलिए सुमेरु को लांघा नहीं जाता। एक बार माला जब पूर्ण हो जाती है तो अपने ईष्टदेव का स्मरण करते हुए सुमेरु को मस्तक से स्पर्श किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांड में सुमेरु की स्थिति सर्वोच्च होती है।

अपने आराध्य की पूजा किस माला से करें? apne aaradhya ki puja kis mala se karen .

माना जाता है कि हमारे जगत में कुछ प्राकृतिक शक्तियां भी निहित हैं, जिन्हें हम मंत्र जाप से प्राप्त करते हैं। पूजा अर्चना के बाद विशेष प्राप्ति या सिद्धि के लिए मंत्र जाप किया जाता है। इसके माध्यम से आप मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं। यह विधि जहां भगवान को प्रसन्न करने में काफी सक्षम मानी जाती है, वहीं कई बार माला का ज्ञान न होने के चलते हम तमाम कोशिशों के बावजूद पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं कर पाते हैं। देवी-देवताओं की पूजा-पाठ करने के लिए कई प्रकार के मालाओं का इस्तेमाल किया जाता हैं, लेकिन हमें किस माला से किस देवी-देवता का जाप करना है, इसकी जानकारी के बिना हमारी मनोकामना पू्र्ण नहीं होती। तो आइये जानते हैं कि कौन सी माला किसके लिए और किस माला से किस मनोकामना की पूर्ति होती है।

सबसे पहले, रुद्राक्ष को भगवान शिव का अंश माना जाता है। माना जाता है कि इससे शिव का जाप कर आसानी से मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती है। अगर आप शिव भगवान को प्रसन्न करना चाहते है, तो रुद्राक्ष की माला से शिव के मंत्रों का जाप करना श्रेष्ठ माना गया है।

मां लक्मी की उपासना करने के लिए स्फटिक की या कमलट्टे की माला को श्रेष्ठ बताया गया है जबकि मां दुर्गा की उपासना लाल रंग के चंदन की माला, जिसे रक्त चंदन माला कहा जाता है, से करना चाहिए।काली का आह्वान करने के लिए काली हल्दी या नील कमल की माला का प्रयोग करना है।

यदि आप बगलामुखी की साधना कर रहे हैं तो आपको पीली हल्दी या जीयापोता की माला का इस्तेमाल करना चाहिए। तुलसी और चंदन की माला से विष्णु भगवान के मंत्र का जाप करना चाहिए।

सूर्य के दोष और उन्हें प्रसन्न करने के लिए माणिक्य, गारनेट, बिल की लकड़ी की माला का उपयोग शुभ माना गया है।
बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए हल्दी या जीया पोताज और शुक्र के लिए स्फटिक की माला से जाप करें।
मंगल ग्रह की शांति के लिए मंगल ग्रह के मंत्र के साथ मूंगे और लाल चंदन की माला से जाप करना चाहिए और वही बुध ग्रह के लिए पन्ने की बनी हुई की माला से जाप करना चाहिए।
चंद्रमा की शांति के लिए आप जिस मंत्र का जाप कर रहे है उस मंत्र का जाप मोती की माला से करना चाहिए।
राहु के लिए गोमेद, चंदन और कच्चे कोयले की माला उपयोगी है, वहीं केतु के लिए लहसुनिया की माला शुभ माना जाता है।
मोक्ष प्राप्ति या शांति के लिए किए जा रहे मंत्र जाप के लिए 108 रुद्राक्ष को सफेद धागें से पिरोंकर जाप करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से मनोकामना पूर्ण होती है। रुद्राक्ष की माला को जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि इसमें कीटाणुनाशक शक्ति के अलावा विद्युतीय और चुंबकीय शक्ति भी पाई जाती है।

अगला प्रश्न यह आता है कि क्या बिना माला के पूजा करने पर या मंत्र जपने पर फल प्राप्त नहीं होता या कम फल मिलता है?
दोस्तों ऐसा नहीं है दरअसल माला एक तरह की गिनने के एक तरह की मशीन यानि कैलकुलेटर है जो आपके हाथ में है जिससे आप गिनती करते हैं। जब सुमेरु आपके हाथ से टकराता है तो आपको यह पता चलता है कि हमारे 108 बार जाप हो चुका है। दरअसल अगर आप पूजा करते समय मंत्र जाप करते समय हाथ पर या लिखकर कहीं पर रखते हैं तो इससे आपका ध्यान बार-बार भटकता है। उसके लिए ऋषि-मुनियों ने माला का प्रावधान बनाया कि माला से जपने पर आपको यह पता चल जाए कि इतने जप हो चुके हैं।

एक बात का ध्यान रखिए यह जरूरी नहीं है कि किसी विशेष माला से जप ने पर आपको सिद्धि प्राप्त हो जाएगी। वास्तव में मंत्र सिद्ध होते हैं और जिस यंत्र को ध्यान में रखकर मंत्रों का जाप किया जाता है वह यंत्र सिद्ध होता है। पर काउंटिंग मशीन यानी माला सिद्ध नहीं होती। हां अगर आप माला सामने रख कर मन में ध्यान करके उसे सिद्ध करें तो वह सिद्ध हो जाती है। यह माला जिसको दे दी जाती है पहनने वाले को उसका लाभ मिलता है। हाथ की माला से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हमारा ध्यान माला की तरफ नहीं होता है मंत्रों की तरफ होता है। अगर आपको हाथ की माला भी सिद्ध करनी है तो आपको उस माला पर ध्यान देना वह से निकालकर सामने रखी है और दूसरी माला लेकर जप करना होगा।

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