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Benefits of reciting ‘Daridraya Dahan Stotra।। ‘ ‘दारिद्रय दहन स्तोत्र’ का पाठ करने के लाभ

Benefits of reciting ‘Daridraya Dahan Stotra, ‘ ‘दारिद्रय दहन स्तोत्र’ का पाठ करने के लाभ, Daridraya Dahan Stotra ke labh,

नमस्कार दोस्तों पियस एस्ट्रो में आपका स्वागत है। इस लेख में हम शिव के महा शक्ति शाली एवं महाकाल को भी चुनौती देने वाला दारिद्रदहन शिव स्तोत्र जो सभी कामनाओं को पूरा करने वाला है उसपर बात कर रहे है। हमारे धर्म ग्रंथों में अनेक अनुष्ठान और स्तोत्र ऐसे बताये गए है, जिनके प्रभाव से व्यक्ति के सभी रास्ते खुल जाते है।
नियमानुसार इस पाठ को कराने से दरिद्रता दूर हो जाती है। शिव का यह महा स्तोत्र जो बल,बुद्धि, धन, यश, कांती, सौभाग्य तथा आरोग्य देने वाला है। ‘दारिद्रय दहन स्तोत्र’ (Daridrya Dahan Stotra) का पाठ करने से मनुष्य को स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। मृत्यु शय्या पर पड़ा प्राणि भी बच जाता है।
दोस्तों ज्यादातर लोग दरिद्रता का मतलब गरीबी समझते हैं परन्तु गरीबी का मतलब निर्धनता होता है। दरिद्र का अर्थ आभावग्रस्त के करीब समझ सकते हैं। धन का न होना मतलब निर्धन, धान्य यानि अन्न का न होना मतलब निधान्य, संतान का का न होना मतलब निसंतान, ज्ञान का न होना यनि अज्ञानी होना, ये सभी दरिद्रता के श्रेणी में आते है उसके आलावा उदार सोच का न होना व धन होते हुए भी किसी की मदद न करना यानि मानसिक गरीबी को भी ग्रंथों में दरिद्र की श्रेणी में रखा गया है।

वीर सावरकर जी ने दलितों पर अत्याचार करने वाले ब्राम्हणो के लिए दरिद्र शब्द का प्रयोग किया। कई जगह दिवाली की रात को लोग सुप बजा कर दरिद्र भागते हैं।
दरिद्र दहन का मतलब है दरिद्रता को जलाने वाला चाहे वह कैसी भी दरिद्रता हो। भगवान शिव का यह स्त्रोत किसी भी तरह की दरिद्रता को नष्ट कर देता है।
आपने सुना होगा
पहला सुख निरोगी काया,
दूजा सुख घर में हो माया।
तीजा सुख कुलवंती नारी,
चौथा सुख पुत्र हो आज्ञाकारी।
पंचम सुख स्वदेश में वासा,
छठवा सुख राज हो पासा।
सातवा सुख संतोषी जीवन,
ऐसा हो तो धन्य हो जीवन ।
विद्वानों का मानना है की ये सुख चाहिए तो दारिद्रय दहन स्तोत्र का नियमित पाठ करना चाहिए।

दारिद्रय दहन स्तोत्र किसने लिखा

दारिद्रयदहन स्तोत्र की रचना ऋषि वशिष्ठ द्वारा की गयी है। ऋषि वशिष्ठ सप्त ऋषि में से एक हैं उन्होंने देखा संसार में अधिकांश मनुष्य मानसिक दरिद्रता–जैसे नकारात्मक भावनाओं–काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद-अहंकार, स्वार्थ, ईर्ष्या-द्वेष, भय आदि से पीड़ित हैं। भगवान शिव के मस्तक पर चन्द्रमा है और चन्द्रमा मन का कारक है। यदि मन आपके काबू में है तो आप सब कुछ पा सकते है। अत: मनुष्य को प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा बाद दारिद्रदहन स्तोत्र का पाठ एक बार अवश्य करना चाहिए क्योंकि ‘स्वस्थ मन तो स्वस्थ तन।’ यही समस्त सुखों का आधार और दुखों के नाश का उपाय है।

किस समय यह पाठ करना चाहिए और कब?

इस स्तोत्र का नित्य पाठ करना शुभकारी माना गया है। यह मात्र 9 श्लोक का स्त्रोत है। यह छोटा जरूर है परन्तु इसका प्रभाव बड़ा है। इसे रोज शाम प्रदोष काल में करना अत्यंत शुभ माना गया है। प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 30 मिनट पहले शरू होता है और सूर्यास्त से लगभग 30 मिनट बाद तक रहता है। इस समय कही भी बैठ कर आप इसका पाठ कर सकते हैं। यदि आपके पास शाम को समय नहीं है तो इसे सुबह सूर्योदय से आधा घंटा पहले भी किया जा सकता है।
महीने में त्रियोदशी यानि जिस दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है उस दिन इसका 108 बार जप किया जा सकता है। यह अत्यंत लाभकर व पुण्य फल देने वाला होता है। यदि आप घोर आर्थिक संकट से जूझ रहे हों, कर्ज में डूबे हों, व्यापार व्यवसाय की पूंजी बार-बार फंस जाती हो तो प्रदोष के दिन इसका 108 बार दारिद्रय दहन स्तोत्र से शिवजी की आराधना करनी चाहिए। जो व्यक्ति कष्ट में हैं अगर वह स्वयं पाठ करें तो सर्वोत्तम फलदायी होता है लेकिन परिजन जैसे पत्नी या माता-पिता भी उसके बदले पाठ करें तो लाभ होता है।

मंत्र कैसे जपें
शिवजी का ध्यान कर मन में संकल्प करें। जो मनोकामना हो उसका ध्यान करें फिर पाठ आरंभ करें। श्लोकों को गाकर पढ़े तो बहुत अच्छा, अन्यथा मन में भी पाठ कर सकते हैं।

विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय कणामृताय शशिशेखरधारणाय ।
कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय ॥१॥

हिंदी अर्थ:- जो इस सकल विश्व के स्वामी हैं, जो नरकरूपी संसारसागर से उद्धार करने वाले हैं, जो कानों से श्रवण करने में अमृत के समान नाम वाले हैं, जो अपने भाल पर चन्द्रमा को आभूषणरूप में धारण करने वाले हैं, जो कर्पूर की कांति के समान धवल वर्ण वाले जटाधारी हैं, उन दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है।

गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिपकङ्कणाय ।

गंगाधराय गजराजविमर्दनाय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय ॥२॥

हिंदी अर्थ:- जो माता गौरी को अत्यंत प्रिय हैं, जो रजनीश्वर(चन्द्रमा) की कला को धारण करने वाले हैं, जो काल के भी अन्तक (यम) रूप हैं, जो नागराज को कंकणरूप में धारण करने वाले हैं, जो अपने मस्तक पर गंगा को धारण करने वाले हैं, जो गजराज का विमर्दन करने वाले हैं, उन दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है।

भक्तिप्रियाय भवरोगभयापहाय उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय ।

ज्योतिर्मयाय गुणनामसुनृत्यकाय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय ॥३॥

हिंदी अर्थ:- जो भक्तिप्रिय, संसाररूपी रोग एवं भय का नाश करने वाले हैं, जो संहार के समय उग्ररूपधारी हैं, जो दुर्गम भवसागर से पार कराने वाले हैं, जो ज्योतिस्वरूप, अपने गुण और नाम के अनुसार सुन्दर नृत्य करने वाले हैं, उन दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है।

चर्मम्बराय शवभस्मविलेपनाय भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय ।

मंझीरपादयुगलाय जटाधराय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय ॥४॥

हिंदी अर्थ:- जो बाघ के चर्म को धारण करने वाले हैं, जो चिताभस्म को लगाने वाले हैं, जो भाल में तीसरा नेत्र धारण करने वाले हैं, जो मणियों के कुण्डल से सुशोभित हैं, जो अपने चरणों में नूपुर धारण करने वाले जटाधारी हैं, उन दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है।

पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डिताय ।

आनन्दभूमिवरदाय तमोमयाय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय ॥५॥

हिंदी अर्थ:- जो पांच मुख वाले नागराज रूपी आभूषण से सुसज्जित हैं, जो सुवर्ण के समान किरणवाले हैं, जो आनंदभूमि (काशी) को वर प्रदान करने वाले हैं, जो सृष्टि के संहार के लिए तमोगुनाविष्ट होने वाले हैं, उन दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है।

भानुप्रियाय भवसागरतारणाय कालान्तकाय कमलासनपूजिताय ।

नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय ॥६॥

हिंदी अर्थ:- जो सूर्य को अत्यंत प्रिय हैं, जो भवसागर से उद्धार करने वाले हैं, जो काल के लिए भी महाकालस्वरूप, और जिनकी कमलासन (ब्रम्हा) पूजा करते हैं, जो तीन नेत्रों को धारण करने वाले हैं, जो शुभ लक्षणों से युक्त हैं, उन दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है।

रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय ।

पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय ॥७॥

हिंदी अर्थ:- जो राम को अत्यंत प्रिय, रघुनाथजी को वर देने वाले हैं, जो सर्पों के अतिप्रिय हैं, जो भवसागररूपी नरक से तारने वाले हैं, जो पुण्यवालों में अत्यंत पुण्य वाले हैं, जिनकी समस्त देवतापूजा करते हैं, उन दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है।

मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय गीतप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय ।

मातङ्गचर्मवसनाय महेश्वराय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय ॥८॥

हिंदी अर्थ:- जो मुक्तजनों के स्वामीस्वरूप हैं, जो चारों पुरुषार्थों का फल देने वाले हैं, जिन्हें गीत प्रिय हैं और नंदी जिनका वाहन है, गजचर्म को वस्त्ररूप में धारण करने वाले हैं, महेश्वर हैं, उन दारिद्र्य रुपी दुःख का नाश करने वाले शिव को मेरा नमन है।

वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोगनिवारणं। सर्वसंपत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम् ।

त्रिसंध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात् ॥९॥

हिंदी अर्थ:- समस्त रोगों के विनाशक तथा शीघ्र ही समस्त सम्पत्तियों को प्रदान करने वाले और पुत्र – पौत्रादि वंश परम्परा को बढ़ानेवाले, वसिष्ठ द्वारा निर्मित इस स्तोत्र का जो भक्त नित्य तीनों कालों में पाठ करता है, उसे निश्चय ही स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है।

॥इति वसिष्ठ विरचितं दारिद्र्यदहनशिवस्तोत्रं सम्पूर्णम्॥

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