Mantra

सिद्ध कुंजिका स्त्रोत

नमस्कार दोस्तों सिद्ध कुंजिका स्त्रोतम अनेकों लाभ वाला स्त्रोत है। दुर्गा सप्तशती का पाठ करने में तक़रीबन डेढ़ घंटा लगता है परंतु कई लोगों के पास इतना समय नहीं होता ऐसी स्थिति में वह लोग सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ कर सकते हैं। जिसे करने में केवल 4 से 5 मिनट लगते हैं। दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय कवच कीलक अर्गला न्यास के पाठ से जो पुन्य प्राप्त होता है वही पुण्य इस 5 मिनट के स्त्रोत से प्राप्त हो जाता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि सिद्ध कुंजिका स्त्रोत और सिद्ध कुंजिका मंत्र दोनों अलग-अलग है। भगवान शिव के अन्य भक्त मारकंडे जी द्वारा लिखित मार्कंडेय पुराण जिसे हम दुर्गा सप्तशती के नाम से जानते हैं उसके अंदर मारकंडे जी ने यह सिद्ध कुंजिका स्त्रोत तम दिया है। इसे सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं पड़ती क्योंकि यह पहले से ही सिद्ध है।

दोस्तों मैं आपको अपने जीवन की एक घटना बताता हूं जब मैं दसवीं में पढ़ता था उस समय मैंने संकल्प लिया कि मैं 41 दिन तक सिद्ध कुंजिका मंत्र का जाप करूंगा। शुरू में तो यह मंत्र पढ़ने पर मुझे लाभ मिलने लगा परंतु जैसे ही 30 दिन बीते मेरा स्वास्थ्य बहुत बुरी तरह खराब हो। आपको मैं बता दूं कि बैठने वाले स्थान पर बड़े-बड़े फोड़े निकल आए थे। शरीर ज्वर के कारण हमेशा तपता रहता था दवाई कोई असर नहीं कर रही थी। उठने तक की हिम्मत नहीं थी मेरी माता जी ने मुझे मना कर दिया कि इसको करने की कोई आवश्यकता नहीं है पहले अपना स्वास्थ्य देखो। परंतु मैंने संकल्प लिया था इसलिए मैं उठा और नहा धो कर बैठ गया इतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं मंत्र ठीक से बोल पाता। उन दिनों बड़े अनमने मन से मैंने यह जाप किया। और जब 41 दिन बीत गए तो अचानक मेरी बीमारी पता नहीं कहां चली गई सारी तकलीफ से शरीर से दूर हो गई पर मां भगवती की कृपा रही उनकी परीक्षा में मैं पास रहा।

दोस्तों आज हम यही बताने जा रहे हैं कि सिद्ध कुंजिका स्त्रोतम और सिद्ध कुंजिका मंत्र में क्या अंतर है और इन दोनों को कैसे जपना चाहिए? तो सबसे पहले आप हम सिद्ध कुंजिका स्त्रोत के बारे में बात कर लेते हैं। आइये जानते हैं कि इसकी विधि क्या है और इसे कैसे करना चाहिए। समस्त बाधाओं का शमन , शत्रु दमन, ऋण मुक्ति, कैरियर, विद्या ,शारीरिक व मानसिक सुख प्राप्त करना चाहते हैं तो सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ अवश्य करना चाहिए। श्री दुर्गा सप्तशती में यह अध्याय सम्मिलित है अर्थात दुर्गा सप्तशती में आपको सिद्ध कुंजिका स्त्रोत मिल जाएगा जो लोग नियमित सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ करते हैं भगवती उनकी रक्षा करती है। जिन लोगों को सदा धन का अभाव रहता है और लगातार आर्थिक नुकसान हो रहा है बेवजह कार्यों में धन चरों ओर खर्च हो। ऐसे लोगों को कुंजिका स्त्रोत का पाठ अवश्य करना चाहिए। शत्रु बाधा व शत्रु से छुटकारा पाने के लिए मुकदमे में जीत के लिए यह स्त्रोत किसी चमत्कार से कम नहीं है। नवरात्रि के दिनों में तो इसका नियमित पाठ किया जाना चाहिए। यह रोग रोग मुक्ति के लिए भी बड़ा लाभकारी है गंभीर से गंभीर रोगों के जपने वाले को मुक्ति मिलती है कर्ज मुक्ति हो उनके लिए यह बहुत अच्छा माना गया है। तथा दांपत्य जीवन के लिए तो यह बहुत अच्छा मन गया है। खास तौर पर महिलाएं यदि इसका नियमित रूप से बात करती हैं तो उनकी मैरिज लाइफ यानी शादीशुदा जिंदगी हमेशा अच्छी रहती है। किसी भी तरह की परेशानी का सामना होने पर व्यक्ति सही निर्णय लेने की छमता रखता है।

सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ मनुष्य अपनी क्षमता के अनुसार कर सकता है लेकिन यदि इसे शाम के समय आरती के बाद किया जाए तो यह बहुत ही अच्छा प्रभाव देता है। इसे रात्रि के समय में भी किया जा सकता है शाम के समय यदि नहाना संभव ना हो तो हाथ पैर धो कर आप इस स्त्रोत का पाठ शुरू कर सकते हैं। स्त्रोत का पाठ करने के लिए देवी के समक्ष दीपक जला लें और लाल रंग का आसन जरूर बिछा लें इसके बाद देवी को धूप दीप और फूल अर्पित करें तथा यदि फूल ना हो तो ऐसी स्थिति में धूप दिखाकर भी काम चल सकता है। फिर कुंजिका स्त्रोत का पाठ एकांत में करें इस बात में कोशिश करें कि जल्दी बाजी ना हो क्योंकि उच्चारण में गलती हो सकती है। कुंजिका स्त्रोत पाठ को बोलकर करना चाहिए इस बात का ध्यान रखिए। हमने मंत्र तंत्र यंत्र एक वीडियो में मंत्रों के बारे में संपूर्ण जानकारी दी है परंतु यहां पर हम आपको एक जानकारी देते हैं कि स्त्रोत का पाठ या सुंदरकांड का पाठ या इस तरह का कोई भी पाठ जब हम करते हैं तो हमें बोलकर करना चाहिए। भले हम उसे मंदी आवाज में करें लेकिन जब हम मंत्र करते हैं तो कोशिश करनी चाहिए कि उस मंत्र को मन ही मन जपा जाए। जिसे हम मानसिक जप के नाम से जानते हैं। जिसे ज्ञानी जन अजपा जप कहते हैं। तो इसीलिए इस बात का ध्यान रखिए।सिद्ध कुंजिका स्त्रोत देवी महत्तम के अंतर्गत परम कल्याणकारी स्त्रोत है। सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ पूरी दुर्गा सप्तशती के पाठ के बराबर होता है। आप जानते होंगे कि कुंजी का मतलब होता है चाबी। भगवान शिव ने इसे एक चाबी के रूप में लोगों को दिया है।

भगवान शिव ने माता पार्वती को इस स्त्रोत के जप का लाभ बताया तथा कहा कि यह गुप्त स्त्रोत है। फिर देवी की स्तुति की व उन्होंने स्त्रोत के कुछ मंत्र व स्त्रोत बताया जिनमें ज्यादातर बीज मंत्र है। जब यह मंत्र समाप्त हो जाते हैं तब भगवान शिव पार्वती जी से कहते हैं कि यह मंत्र भक्ति ही पुरुष को नहीं देना चाहिए तथा इसे गुप्त रखना चाहिएयह कुंजिका अत्यंत गुप्त और देवों के लिए दुर्लभ है। इसे गुप्त रखी यह उन्हीं लोगों को देना चाहिए जो देवी में पूर्ण आस्था रखते हैं तथा बाद में उन्होंने कहा कि जो बिना कुंजिका के दुर्गा सप्तशती का पाठ करता है उसे किसी भी प्रकार की सिद्धि नहीं पड़ती उसी तरह जैसे वन में रोना निरर्थक होता है।

अब हम आपको सिद्ध कुंजिका मंत्र के बारे में जानकारी देते हैं सिद्ध कुंजिका मंत्र बहुत लाभकारी माना चाहता है सिद्ध कुंजिका स्त्रोत की तरह ही मंत्र भी काफी गोपनीय है और यह बहुत लाभकारी भी है। मात्र 41 दिन एक माला जपने से यहाँ मंत्र आपके लिए सिद्ध हो जाता है। फिर यदि मात्रा 11 बार इसका जप करने पर यह जीवन पर्यन्त आपकी रक्षा करता है। मुसीबत में पड़ने पर 11 बार जपने से मनुष्य मुसीबत से निकल जाता है।
इस मंत्र को किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं करना है क्योंकि यह मंत्र बहुत ही अचूक होता है इससे बहुत से लाभ मिलते हैं जैसे आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। कुंजिका मंत्र के जाप से सीखने की क्षमता बढ़ जाती है। स्मरण शक्ति बढ़ती है तथा अंदर से कला का उद्भव होने लगता है। समाज में आप का मान सम्मान बढ़ता है और घर परिवार में समृद्धि बढ़ती है। साथ ही यदि कर्जा बहुत हो गया तो कर्जा चुकाने की क्षमता आने लगती है। नौकरी अथवा व्यापार में आपको लगातार घाटा होता है या तकलीफों का सामना करना पड़ता है तब भी आपको कुछ सिद्ध कुंजिका मंत्र का पाठ करना चाहिए। हर तरह के भौतिक व आध्यात्मिक सुख के लिए यह मंत्र बड़ा उत्तम माना गया साथ ही नवग्रह दोष को शांत करता है तथा आपके अंदर आकर्षण शक्ति बढ़ा देता है। इस मंत्र के प्रभाव से आपकी उम्र कम लगने लगती है यह मंत्र आपको साहसी बनाता है तथा शत्रु पर हमेशा विजय दिलाता हैं। इसका कैसे अभ्यास करना चाहिए तो शांत वातावरण में ढीले कपड़े पहन कर किसी भी मुद्रा में बैठ जाइए और संकल्प लीजिए कि मैं एक माला करना चाहता हूं। यदि घुटने मोड़कर बैठने में दिक्कत हो तो आप कुर्सी आदि पर भी लाल कपड़ा बिछाकर बैठ सकते हैं। उसके बाद सामान्य रूप से 10 बार लंबी लंबी सांसे लेकर प्राणायाम कीजिए फिर अपने आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाते हुए सिद्ध कुंजिका मंत्र का जाप आरम्भ कर सकते हैं।

इस मंत्र का जाप नियमित 108 बार 41 दिन तक करें जैसा कि हम पहले बता चुके हैं। अब आपको कुछ नियमों का ध्यान रखना है सबसे पहले तो यह बहुत ही स्ट्रांग मंत्र है इसलिए आपको देवी भगवती पर पूरा विश्वास रखना है। साथ ही जिस के अभ्यास से आपको सफलता मिलती जाएगी वैसे वैसे आपके स्वभाव और आदतों में बदलाव आने शुरू हो जाएंगे। साथ ही कुछ परेशानियां भी आपको आएंगी क्योंकि भगवती अपने भक्तों की परीक्षा लेती है यदि परेशानियां आए तो इसे छोड़ना नहीं है इसे किसी भी तरह से 41 दिन में पूरा करना है।

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